हर घर नारी सम्मान हो,
हर चेहरे पर मुस्कान हो!
संस्कार,संस्कृति से सजा हर घर हो,
ना कोई करता अभिमान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सारे धर्मों का सम्मान हो!
भेदभाव न हो ऊँच-नीच का,
न ही किसीका अपमान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
माँ बहनो की इज्जत ना लुटे,
न बेगुनाहो का कत्लेआम हो!
इंसान के भेष में घूमे यहाँ,
न ऐसा कोई हैवान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
भ्रस्ट नेताओं का नाम नहीं हो,
अबकी ऐसा मतदान हो!
जो समझे समाज के अधिकारों को,
वो नेता नहीं कोई आम हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
Written by-Kishor Saklani
हर चेहरे पर मुस्कान हो!
संस्कार,संस्कृति से सजा हर घर हो,
ना कोई करता अभिमान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सारे धर्मों का सम्मान हो!
भेदभाव न हो ऊँच-नीच का,
न ही किसीका अपमान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
माँ बहनो की इज्जत ना लुटे,
न बेगुनाहो का कत्लेआम हो!
इंसान के भेष में घूमे यहाँ,
न ऐसा कोई हैवान हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
भ्रस्ट नेताओं का नाम नहीं हो,
अबकी ऐसा मतदान हो!
जो समझे समाज के अधिकारों को,
वो नेता नहीं कोई आम हो!
इस दुनिया में हिंदुस्तान कि
अपनी अलग पहचान हो!
Written by-Kishor Saklani
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