बेटी का सम्मान करो
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
बेटी घर की मुस्कान है. बेटी घर की शान है.
जीने दो आजादी से, क्या इसने किया गुनाह है.
दुनिया के संग चलने दो, पायेगी अपनी पहचान को
नाम करेगी रोशन, छुयेगी आसमान को.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
पढ़ा लिखा बेटी को, बेटी का सम्मान करो.
मत छीनो प्यारी सी मुस्कान, ना बेटी का अपमान करो.
सोच बदल दो तुम दुनिया की, बेटी को पहचान दो.
जानबूझकर अंजान बन रहा,समझा दो उस नादान को.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
दुनिया माँ कहती है जिसे,बेटी उस माँ का ही रूप है.
दया भाव है माँ के हृदय में,बेटी उस ममता का रूप है.
बेटियों को काबिल बना, खुद पर तुम गर्व करो.
दुनिया वाले क्या कहेंगे, दुनिया वालो से ना डरो.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
Written by-Kishor Saklani.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
बेटी घर की मुस्कान है. बेटी घर की शान है.
जीने दो आजादी से, क्या इसने किया गुनाह है.
दुनिया के संग चलने दो, पायेगी अपनी पहचान को
नाम करेगी रोशन, छुयेगी आसमान को.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
पढ़ा लिखा बेटी को, बेटी का सम्मान करो.
मत छीनो प्यारी सी मुस्कान, ना बेटी का अपमान करो.
सोच बदल दो तुम दुनिया की, बेटी को पहचान दो.
जानबूझकर अंजान बन रहा,समझा दो उस नादान को.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
दुनिया माँ कहती है जिसे,बेटी उस माँ का ही रूप है.
दया भाव है माँ के हृदय में,बेटी उस ममता का रूप है.
बेटियों को काबिल बना, खुद पर तुम गर्व करो.
दुनिया वाले क्या कहेंगे, दुनिया वालो से ना डरो.
जुल्म न करो तुम बेटी पर, प्यार करो सम्मान दो.
प्यार करो गले लगा लो, इस नन्ही सी जान को.
Written by-Kishor Saklani.
No comments:
Post a Comment