Sunday, April 2, 2017

वीरों को नमन

मातृभूमि  की  सेवा  करने , सीना ताने जो वीर चले.
इस  देश की रक्षा के खातिर, जो अपने घर से दूर चले.
ऐसे  वीर सपूतों  को नमन करें, हम नमन करें.

जलती तप्ती धुप कही हों, या हों बर्फ से ढके पहाड़.
तैनात हमेशा रहते है, तूफां आ जाये या आये बाढ़.
वो चैन नही उनको वहाँ पर,जो मिलता हमको चैन यहाँ
इन वीरों के कारन ही, जशनों चीज त्यौहार बनते यहाँ.
अगर वीर ना होते तो, ना होता रंगीं माहौल यहाँ.
ऐसे साहसी वीरों को नमन करें, हम नमन करें.

मातृभूमि  की  सेवा  करने , सीना ताने जो वीर चले.
इस  देश की रक्षा के खातिर, जो अपने घर से दूर चले.
ऐसे  वीर सपूतों  को नमन करें, हम नमन करें.


धन्य है वो मात -पिता, ऐसे वीरों को जनम  दिया.
देश के लिए दिल के टुकड़े को, अपने से दूर किया.
ना भूले हैं, ना भूलेंगे इतनी बड़ी कुर्बानी को.
जो जान दे चले हँसते-हँसते, उनकी इस बलिदानी को.
बलिदान दे चुके वीरों को नमन करें, हम नमन करें.

मातृभूमि  की  सेवा  करने , सीना ताने जो वीर चले.
इस  देश की रक्षा के खातिर, जो अपने घर से दूर चले.
ऐसे  वीर सपूतों  को नमन करें, हम नमन करें.

Written by-Kishor Saklani

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