फाल्गुन के दिन.
जब फाल्गुन के दिन आते हैं, होली को संग में लाते हैं.
सब गांव शहर के लोग इस रंग में रंग जाते हैं.बात करूँ अगर गांव घरो की क्या रंगी नज़ारे होते हैं,
रंग बिरंगे कपड़ो में सब होली को संग में गाते है.
इस रंगबिरंगी दुनिया में सब ऐसे खो जाते है,
काँटों के बीच रहकर जैसे फूल महकते जाते हैं.
जब फाल्गुन के दिन आते हैं, होली को संग में लाते हैं.
सब गांव शहर के लोग इस रंग में रंग जाते हैं.
इस प्यार भरे उत्सव के बिन भला वो कैसे रह पाते,
अपने घर के लोगो से जो दूर कमाने जाते.
मात पिता और घर की खुशियों में चार चाँद लगाते है,
जब चन्द दिनों की छूट्टी लेके वो भी घर आ जाते हैं.
जब फाल्गुन के दिन आते हैं, होली को संग में लाते हैं.
सब गांव शहर के लोग इस रंग में रंग जाते हैं.
प्यार भरी इस होली का बच्चे भी इंतजार करते हैं,
गुब्बारे और पिचकारी से आनंदित हो उठते है.
वो बचपन होली के दिन भी, कैसे कोई भूलेगा,
लड़ते झगड़ते आपस में सब को रंग देते है.
जब फाल्गुन के दिन आते हैं, होली को संग में लाते हैं.
सब गांव शहर के लोग इस रंग में रंग जाते हैं.
written by-Kishor Saklani
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